उदयपुर। पारस हेल्थ ने मेडिकल वर्कशॉप (CME) आयोजित जिसमें डॉक्टर्स ने इस बात पर चर्चा की कि रेडिएशन थेरेपी, जिसे आम तौर पर कैंसर के इलाज के लिए जाना जाता है, अब कैंसर के अलावा अन्य जटिल (कॉम्प्लेक्स) और सामान्य बीमारियों के इलाज में भी बहुत असरदार साबित हो रही है। एक्सपर्ट्स ने जोर देकर कहा कि नई और सटीक (Precision) रेडिएशन तकनीक उन मरीजों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ है, जिन्हें साधारण दवाइयों या इलाज से फायदा नहीं मिल पाता।
इस बैठक में, डॉक्टर्स ने ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (चेहरे के भयंकर दर्द), केलोइड्स (सर्जरी या चोट के बाद बनने वाले मोटे निशान), और कुछ सूजन (Inflammatory) वाली बीमारियों में रेडिएशन के नए इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। पारस हेल्थ के रेडिएशन ऑनकोलॉजिस्ट, डॉ. कीर्ति शिवहरि ने बताया कि वे अब सटीक रेडिएशन का इस्तेमाल करके इन नॉन-ऑन्कोलॉजिकल मरीजों को दर्द से राहत दिलाने और उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। भारत के कई अस्पतालों के अनुभव भी बताते हैं कि केलोइड को हटाने के बाद तुरंत रेडिएशन देने से बीमारी के वापस आने का खतरा बहुत कम हो जाता है।
हालांकि, पारस हेल्थ के डॉक्टर्स, डॉ. मनोज महाजन (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) और डॉ. सौरभ शर्मा (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) ने यह भी स्पष्ट किया कि यह इलाज हमेशा टीम वर्क से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रेडिएशन का इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण (Evidence) हो और इसे मरीज़ की स्थिति के अनुसार सावधानी से प्लान किया जाए। खासकर, केलोइड्स जैसी बार-बार होने वाली बीमारियों में सर्जरी के बाद रेडिएशन देने से बीमारी को लंबे समय तक कंट्रोल करने और इलाज को सफल बनाने में मदद मिलती है।






