उदयपुर। पारस हेल्थ उदयपुर ने आकृति न्यूएज इवोल्यूशन फाउंडेशन के साथ मिलकर कोच और पीटी टीचरों के लिए एक ‘स्पोर्ट्स इंजरी अवेयरनेस सेशन’ आयोजित किया। इसका मुख्य उद्देश्य खेल के दौरान लगने वाली चोटों की जल्दी पहचान करना और मैदान पर ही तुरंत मदद (फर्स्ट रिस्पॉन्स) देना था। इस ट्रेनिंग में स्पोर्ट्स टीचर और कोच को सिखाया गया कि चोट लगने पर खिलाड़ियों की मदद कैसे करें ताकि वे जल्दी रिकवर हो सकें और उनकी चोट गंभीर न बने।
कार्यक्रम में डॉ. आशीष सिंघल ने बताया कि स्कूलों में अक्सर खेल की चोटों पर ध्यान नहीं दिया जाता या गलत इलाज होता है, जिससे चोट पुरानी और गंभीर समस्या बन जाती है। चूंकि कोच और टीचर ही सबसे पहले खिलाड़ी को संभालते हैं, इसलिए उन्हें सही जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। वहीं, फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. प्रसून कुमार ने कहा कि इलाज से बेहतर बचाव है। अगर हम चोट को शुरुआती स्टेज में ही ठीक से संभाल लें, तो युवा खिलाड़ी बिना किसी डर के लंबे समय तक अपना खेल जारी रख सकते हैं।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. विशाल भट्ट ने समझाया कि सही वार्म-अप रूटीन और खेलने के सही तरीके से कई चोटों को रोका जा सकता है। सेशन में घुटने, कंधे और टखने की चोटों पर चर्चा की गई और बताया गया कि कब सर्जरी ज़रूरी है और कब सिर्फ फिजियोथेरेपी से काम चल सकता है। पारस हेल्थ इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकलकर आम लोगों और खिलाड़ियों को जागरूक करने का काम कर रहा है।







