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हथियारों के दम पर विश्व शांति की बात करना भी घोर हिंसा

👉 मानवता और न्यायिक व्यवस्था के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की जरुरत
👤 Mewar Express News
July 8, 2025

डी. एस. पालीवाल

उदयपुर। दुनिया की साम्राज्यवादी और कॉर्पोरेट व्यवस्था ने मुनाफे के लिए हथियारों की होड़ तेज कर दी है तथा वैश्विक संस्थाएं पंगु हो गई है जिसका खामियाजा विश्व के गरीब नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। ये विचार नागरिक एवं जन संगठनों के साझा मंच, उदयपुर की बैठक में संयोजक मानाराम डांगी ने व्यक्त किये।

बैठक में डांगी ने फिलिस्तीनियों के नरसंहार तथा ईरान पर इजरायल अमेरिकी हमले के बारे में विस्तार से बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ के पुनर्गठन और वीटो पावर समाप्त करने की मांग की।
बैठक में प्रकृति मानव केंद्रित जन आंदोलन के बलवंत सिंह ने कहा कि विश्व का शासक वर्ग जन विरोधी साबित हो गया है ऐसे में प्रकृति- मानव केंद्रित व्यवस्था का निर्माण अनिवार्य है।
बैठक में मुस्लिम महासंघ के एडवोकेट सिद्धकी ने मध्य एशिया में युद्ध और अशांति के लिए अमेरिकी इजरायली शासको को जिम्मेदार बताया।
एडवोकेट सलीम खान ने मुसलमानों को आतंकवादी और आदिवासियों को नक्सलवादी कहकर दमन करने की नीति की तुलना इजरायल द्वारा हमास के नाम पर वहां के बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों के नरसंहार से की।
बैठक में आर.डी.व्यास ने पश्चिमी मीडिया तथा देश के मीडिया को ब्राह्मक, झूठी और अर्ध सत्य खबरों का वाहक बताया तथा कहा कि जागरूक नागरिकों व बुद्धिजीवों को आम लोगों के बीच सत्य का प्रसार करना चाहिए।
बैठक में जनतांत्रिक अधिकार सुरक्षा संगठन के समीर बनर्जी ने हथियारों की होड़ को चिंताजनक और विकास विरोधी बताया।
गुलाब नूर खान ने नगर से समस्त जन संगठनों के सहयोग से विश्व शांति और मानवता के लिए आवाज बुलंद करने और लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता बताइ।
बैठक में भ्रष्टाचार मुक्त भारत के हरीश सुवालका ने विश्व की संस्थाओं की तरह ही भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर हमले के संदर्भ में बोलते हुए संवैधानिक व जनतांत्रिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार हिम्मत सेठ ने विश्व की जनता के उभार व प्रतिरोध की सराहना करते हुए गाजा पर हमले तथा हथियारों की बिक्री व विश्व के प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकने के लिए आंदोलन तेज करने की आवश्यकता बताइ।
देश-विदेश की परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए डी.एस. पालीवाल ने विषय प्रवेश किया व बैठक का संचालन किया। धन्यवाद की रस्म मोहन वर्मा ने अदा की।

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