उदयपुर। मुंबई की भागदौड़ और शूटिंग के बिजी शेड्यूल के बीच, सोनी सब के कलाकार अक्सर अपने घर के सुकून को याद करते हैं। ऋषि सक्सेना, दीक्षा जोशी, श्रेनु पारिख, पूजा कतुरडे और रजत वर्मा जैसे एक्टर्स काम के चलते अपने होमटाउन से दूर हैं, लेकिन वहां की यादें उनके लिए बहुत मायने रखती हैं। इन कलाकारों ने अपने बचपन, वहां के खाने और त्यौहारों से जुड़े अनुभव शेयर किए हैं। उनका मानना है कि ये यादें उन्हें मुश्किल समय में इमोशनल सपोर्ट देती हैं और अहसास दिलाती हैं कि वे चाहे कहीं भी हों, घर हमेशा उनके दिल में रहता है।
जोधपुर के ऋषि सक्सेना को वहां की नीली गलियों और मिर्ची वड़े की खुशबू बहुत याद आती है। वे कहते हैं कि वहां की धीमी रफ़्तार और माँ के हाथ की दाल-बाटी उन्हें जमीन से जोड़े रखती है। वहीं, बड़ौदा की श्रेनु पारिख का कहना है कि उनके शहर के सांस्कृतिक माहौल ने ही उन्हें कलाकार बनाया है। उन्हें नवरात्रि में दोस्तों के साथ पूरी रात गरबा खेलना, उत्तरायण पर पतंग उड़ाना और दिवाली पर परिवार के साथ पारंपरिक नाश्ते का आनंद लेना बहुत याद आता है। उनके लिए घर का मतलब ही ये त्यौहार और पुरानी यादें हैं।
अहमदाबाद की दीक्षा जोशी अपने कॉलेज के दिनों और साबरमती रिवरफ्रंट की शांति को याद करती हैं। उन्हें लगता है कि शहर की रौनक और पुराने किस्सों ने उनके व्यक्तित्व को निखारा है। दूसरी तरफ, पुणे की पूजा कतुरडे को सर्दियों के मौसम में दादी के हाथ के बने तिल-गुड़ के लड्डू बहुत याद आते हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज ने उन्हें आत्मविश्वास दिया, लेकिन दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर जाना और वहां की मिसल पाव खाना, ऐसी यादें हैं जो हमेशा उनके दिल के करीब रहेंगी






