डी. एस. पालीवाल
उदयपुर। सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. आलम शाह ख़ान की 23वीं पुण्यतिथि पर उदयपुर में “हिंदी कहानी: आज और कल” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम कजरी होटल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में आलम शाह ख़ान यादगार समिति की समन्वयक प्रोफेसर तराना परवीन ने डॉ. ख़ान के व्यक्तित्व और उनकी अनूठी कहानियों पर जानकारी देते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस संगोष्ठी की शुरुआत प्रमुख आलोचक डॉ. माधव हाड़ा ने नई कहानी, समांतर कहानी और यथार्थवादी कहानियों पर चर्चा के साथ की। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय लोक कला मंडल के निदेशक लईक हुसैन ने की और यादगार समिति के अध्यक्ष आबिद अदीब ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस गरिमामय कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर सरवत ख़ान ने किया, जबकि डॉ. तबस्सुम ने स्वागत और शकील ख़ान ने सभी का आभार जताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और केंद्रीय साहित्य अकादमी की पत्रिका समकालीन भारतीय साहित्य के संपादक बलराम ने कहा कि साहित्य समाज की सोई हुई चेतना और संवेदना को जगाने का काम करता है। उन्होंने डॉ. आलम शाह ख़ान को देश का नामवर और दूरदृष्टा रचनाकार बताते हुए कहा कि उन्होंने वंचित वर्गों के जीवन पर ऐसी मार्मिक कहानियाँ लिखीं जिनसे आमतौर पर लेखक बचते थे। प्रतिष्ठित कवि और लेखक पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश देवल ने कहा कि ख़ान साहब मनुष्यता के सच्चे पक्षधर थे, जिन्होंने हाशिए के लोगों पर अद्भुत भाषा और शैली में कहानियाँ रचीं और वंश भास्कर जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ पर ऐतिहासिक संपादन कार्य किया।
युवा उपन्यासकार नवीन चौधरी ने आज की युवा पीढ़ी के साहित्य सृजन और शोध की प्रवृत्ति पर प्रकाश डालते हुए हिंदी भाषा के विस्तार और साहित्य को पाठकों तक पहुँचाने की जरूरत पर जोर दिया। वरिष्ठ व्यंग्यकार और कथाकार फ़ारूक़ आफरीदी ने कहा कि डॉ. ख़ान मानव अधिकारों के सशक्त पैरोकार थे और नए रचनाकारों की प्रेरणा के लिए उनकी सभी कहानियों को सामने लाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर यादगार समिति द्वारा सभी अतिथियों को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर सदाशिव श्रोत्रिय, माधव नागदा, प्रोफेसर हेमेन्द्र चंडालिया, बाल साहित्यकार विमला भंडारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्धजन उपस्थित थे।







