उदयपुर। वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल 7 से 9 फरवरी तक होगा जिसमें बिखरेगा संगीत का जादू। सहर के संस्थापक निदेशक संजीव भार्गव ने कहा कि हिन्दुस्तान जिंक और राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग से सहयोग प्राप्त इस फेस्टिवल की परिकल्पना सहर ने की है। आगंतुकों के लिये निशुल्क प्रवेश के साथ यह विश्व स्तरीय संगीत को सभी तक पहुँचाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहा है। यह भारत में होने वाला एकमात्र आयोजन है, जो दुनियाभर के संगीत को राजस्थान के लोगों तक पहुँचाता है।
इस बार 15 से ज्यादा देशों के 22 से अधिक बैंड्स के परफॉर्मेंसेस लाकर यह फेस्टिवल दुनिया के हर कोने से संगीत का बेजोड़ अनुभव देगा। इनमें अर्जेंटीना, ईरान, स्वीडन, स्पेन, आइवरी कोस्ट, कुर्दिस्तान, जर्मनी, हंगरी, रियूनियन आइलैण्ड, आदि देश शामिल हैं। इनमें से कई अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों का यह भारत में पहला परफॉर्मेंस होगा। दुनिया में मशहूर एक्ट्स के अलावा इस जश्न में भारतीय प्रतिभाओं का भी एक शानदार लाइनअप होगा। इनमें शान, कर्ष काले, कनिका कपूर, फरीदकोट, सुकृति – प्रकृति और वेस्टर्न घाट्स आदि शामिल हैं।
यह फेस्टिवल झीलों की इस नगरी में तीन खूबसूरत स्थानों पर आयोजित होने वाला है। ये कार्यक्रम दिन के बदलते पहर और मूड के अनुसार ही होगा। 8 और 9 फरवरी ( सुबह 8 से 10 बजे) को मांजी का घाट पर सिटी पैलेस, जग मंदिर और घाट के जादुई पृष्ठभूमि में मोहक प्रस्तुतियों के साथ सुबह की शुरूआत होगी । 8 और 9 फरवरी को (दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे ) दोपहर का मंच फतेह सागर पाल होगा, जहां विश्व संगीत के इस सुखद मेल की पेशकश की जाएगी। यह मंच संगीत की धुनों में डूबने और अपनी परेशानियों को भूल जाने का एक बेहतरीन माहौल तैयार करने वाला है। सूरज ढलने के साथ ही 7 से 9 फरवरी ( शाम 6 से रात 10 बजे तक) को उत्सव गांधी मैदान में परवान चढ़ेगा। जहां हर दिन धमाकेदार परफॉर्मेंस के साथ ढलने वाला है। अरुण मिश्रा, सीईओ, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने कहा यह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों को भारत में ला रहा है और दर्शकों का परिचय ध्वनियों तथा संस्कृतियों के एक व्यापक विस्तार से करवा रहा है। इस साल के कलाकार भी उस परंपरा को जारी रखेंगे और एक अनोखा तथा यादगार अनुभव देंगे। कलात्मक संवाद को बढ़ावा देने वाली और दुनिया में संगीत का आदान-प्रदान करने वाली इस पहल में सहयोग देने पर हमें गर्व है। यह फेस्टिवल सिर्फ संगीत का उत्सव नहीं है, बल्कि ऐसा मंच है, जो सांस्कृतिक सम्बंधों और सामुदायिक उत्साह को मजबूती देता है।







