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भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत उसकी विविधता में

👤 Mewar Express News
February 10, 2026

उदयपुर/मुंबई। भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत उसकी विविधता में है, जहाँ अलग-अलग धर्मों और विचारधाराओं के लोग मिलकर काम करते हैं। भारतीय राजनीति में मुस्लिम समुदाय का योगदान केवल संख्या के प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा है। आजादी के बाद से अब तक, मुस्लिम नेताओं ने नीति निर्माण, विदेश नीति, सामाजिक न्याय और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में कार्य किया है। अलग-अलग पार्टियों से जुड़े इन नेताओं ने कभी मंत्री पद संभालकर तो कभी संगठन में रहकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना योगदान दिया है।

विभिन्न नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियां निभाई हैं। सलमान खुर्शीद ने कानून और विदेश मंत्रालय में काम किया, जबकि भाजपा के शाहनवाज़ हुसैन ने नागरिक उड्डयन और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय संभाले। मुख्तार अब्बास नक़वी ने संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों में नीतियां बनाईं, वहीं असदुद्दीन ओवैसी संसद में संवैधानिक अधिकारों के मुद्दों पर पक्ष रखते हैं। तारिक अनवर और मोहसिना किदवई का कार्य संगठन और संसदीय राजनीति पर केंद्रित रहा। फारूक़ अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भूमिका निभाई, तो गुलाम नबी आजाद ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रशासनिक कार्य किया। नजमा हेपतुल्ला ने मंत्री पद और राज्यपाल के रूप में सेवाएं दीं।

इनके अलावा, अहमद पटेल जैसे नेताओं ने सार्वजनिक मंच की बजाय संगठन के भीतर रहकर चुनावी रणनीति और गठबंधन प्रबंधन का काम किया। इन सभी नेताओं का राजनीतिक सफर यह स्पष्ट करता है कि मुस्लिम नेतृत्व किसी एक शैली या विचारधारा तक सीमित नहीं है। कुछ नेताओं ने शांत रहकर संस्थागत काम किया, तो कुछ ने मुखर होकर अपनी बात रखी। यह विविधता दर्शाती है कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का अर्थ केवल पहचान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों और नीतियों के बीच संतुलन बनाना है।

लेखक: डॉ. अतुल मलिकराम

(ये लेखक के स्वतंत विचार है)

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