उदयपुर। शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर ‘वैश्विक जंगी जुनून’ विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें वक्ताओं ने चेताया कि यदि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हो रही ज्यादती से ईरान यदि जवाबी कार्रवाई में हरमुज जल मार्ग बंद करता है, तो भारत का 60% एलएनजी और भारी मात्रा में एलपीजी आयात प्रभावित होगा। साथ ही, खाड़ी देशों में काम कर रहे करीब एक करोड़ भारतीय मजदूरों द्वारा भेजे जाने वाले 50 बिलियन डॉलर (साढे चार हजार करोड़ रुपये) पर भी खतरा मंडराएगा। इससे देश में महंगाई और औद्योगिक मंदी बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर मजदूर, किसान और मेहनतकश वर्ग की आय पर पड़ेगा।
संगोष्ठी में उपेंद्र शंकर ने विश्व भर में फैले अमेरिकी सैन्य अड्डों और पाबंदियों की जानकारी देते हुए इनका विरोध करने की जरूरत बताई। हेमेंद्र चंडालिया, मन्नाराम डांगी और समीर बनर्जी ने विभिन्न देशों पर थोपे गए युद्धों और रूस-यूक्रेन संकट का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह साम्राज्यवादी ताकतों की ‘दादागिरी’ प्रकृति और मानवता का विनाश कर रही है। वक्ताओं ने जोर दिया कि भारत सरकार को एक प्रभावी विदेश नीति के जरिए इस आसन्न आर्थिक संकट को हल करने की कोशिश करनी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में निर्णय लिया गया कि युद्ध के खिलाफ शहर में शांति मार्च निकाला जाएगा। सचिव डी.एस. पालीवाल ने बताया कि गोष्ठी में अरुण व्यास, शंकर लाल चौधरी, हिम्मत सेठ, अशोक मंथन, हरिश सुहालका, युसूफ अली और आरडी व्यास ने भी अपने विचार रखे। अध्यक्षता कर रही ज्योत्सना झाला ने लोगों को जागरूक करने के लिए पर्चे बांटने, मोहल्ला सभाएं करने और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से युद्ध विरोधी वातावरण तैयार करने का आह्वान किया।






