उदयपुर। शहादत दिवस समारोह समिति ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में क्रांतिकारी राम प्रसाद ‘बिस्मिल’, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह की मूर्तियां तोड़े जाने के विरोध में जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजा। समिति ने मांग की है कि मूर्तियों को कचरे में फेंकने वाले अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, इन तीनों क्रांतिकारियों की भव्य मूर्तियां पूरे सम्मान के साथ दोबारा स्थापित की जाएं।
समिति के सचिव डी.एस. पालीवाल ने बताया कि जिस दिन देश भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु का शहादत दिवस मना रहा था, उसी सुबह नगर सौंदर्यीकरण के नाम पर काकोरी कांड के इन शहीदों की मूर्तियों को खंडित कर कचरे में फेंक दिया गया। इस घटना से पूरे देश की जनता में भारी गुस्सा है। पीयूसीएल के अरुण व्यास ने इसे कायराना हरकत बताते हुए कहा कि जो लोग आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं थे, वे शहीदों की शहादत की अहमियत नहीं समझ रहे हैं।
वहीं, जनतांत्रिक अधिकार सुरक्षा संगठन के समीर बैनर्जी ने कहा कि बुलडोजर राज के जरिए क्रांतिकारियों की विरासत को खत्म नहीं किया जा सकता। ज्ञापन देने वाले दल में रमेश नंदवाना (जंगल जमीन जन आंदोलन), मन्नाराम डांगी (नागरिक एवं जन संगठनों के मंच), एडवोकेट सी.पी. शर्मा और नरेंद्र बागड़ी जैसे प्रमुख लोग शामिल थे। इन सभी ने एक सुर में शहीदों के अपमान पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।







