उदयपुर। उदयपुर के विभिन्न ट्रेड यूनियन और जनतांत्रिक संगठनों ने नोएडा और मानेसर के मजदूरों के समर्थन में आवाज उठाई है। इन संगठनों ने मजदूरों पर हो रहे दमन को रोकने और उनकी जायज मांगों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा। जनवादी मजदूर यूनियन के संरक्षक डी. एस. पालीवाल ने कहा कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राजस्थान के भिवाड़ी और नीमराणा तक फैल चुका है। मजदूरों की मुख्य मांगें 8 घंटे काम, डबल ओवर टाइम, उचित अवकाश, कम से कम 26000 रुपये न्यूनतम वेतन और यूनियन बनाने का अधिकार हैं। संगठनों का आरोप है कि सरकारें इन मांगों को मानने के बजाय मीडिया के जरिए मजदूरों को बदनाम कर रही हैं।
जनतांत्रिक अधिकार सुरक्षा संगठन के समीर बैनर्जी ने पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और फर्जी मुकदमों के जरिए मजदूरों को दबाने की साजिश का विरोध किया। वहीं, पी.यू.सी.एल. के अरूण व्यास ने 1150 से अधिक मजदूरों, सांस्कृतिक कर्मियों और बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा की। जंगल, जमीन, जन आन्दोलन के रमेश नंदवाना ने स्पष्ट किया कि अपनी मांगों के लिए आंदोलन करना मजदूरों का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। प्रोफेसर हेमेन्द्र चण्डालिया ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि देशभर में मजदूरों का शोषण लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे रोकना अनिवार्य है।
राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से छह मांगें रखी गई हैं। इसमें पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने, गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा करने, दर्ज किए गए झूठे मुकदमे वापस लेने और पुलिस की गुंडागर्दी पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही, संगठनों ने 4 श्रमिक संहिताओं को रद्द कर औद्योगिक शांति बहाल करने की भी अपील की है। इस प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद खुर्शीद, डालजन्द मेघवाल, नरेंद्र कुमार और जयन्ती लाल सहित अन्य लोग शामिल थे।







