उदयपुर। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर ग्लोबल हिस्ट्री फोरम के संस्थापक महासचिव डॉ. अजात शत्रु सिंह शिवरती के नेतृत्व में इतिहासकारों के एक दल ने गुजरात के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। इस दल ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्मित वडनगर पुरातात्विक अनुभवात्मक संग्रहालय और ईडर की सांस्कृतिक धरोहर का अवलोकन किया। 298 करोड़ की लागत से बना यह संग्रहालय 2500 वर्षों की निरंतर मानव बस्ती के इतिहास को दर्शाता है। यात्रा के दौरान दल ने प्रेरणा स्कूल और ईडर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य जयदीप सिंह ईडर एवं करनी सिंह ईडर से भी मुलाकात की।
इतिहासकारों के इस दल ने मेवाड़ और बड़नगर के सम्बन्ध क़ो ऐतिहासिक स्त्रोतो से जोड़ने का प्रयास किया, मेवाड़ के गुहिल राजा शिलादित्य के शासनकाल के सम्भोली ग्राम के शिलालेख का उल्लेख करते हुए एक महत्वपूर्ण संभावना व्यक्त की है। इस शिलालेख के अनुसार, वटनगर से आए महाजनों के मुखिया जेंतक ने अरण्यवासिनी देवी का मंदिर बनवाया था। पूर्व में पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने इस वटनगर को सिरोही का बसंतगढ़ बताया था, जबकि गोपीनाथ शर्मा ने जावर क्षेत्र को प्रमुख खनन केंद्र माना था। हालांकि, गुजरात के प्राचीन वडनगर के उत्खनन और वैभव को देखने के बाद इतिहासकारों का मानना है कि शिलालेख में वर्णित वटनगर वास्तव में गुजरात का वडनगर ही रहा होगा।
दल के सदस्य राजेंद्र नाथ पुरोहित, जे. के. ओझा, हरीश राव, रामसिंह राठौड़, सुरेन्द्र चौहान और शोधार्थी पीनल जैन ने एकमत से कहा कि तुलनात्मक दृष्टि से गुजरात का वडनगर अत्यंत उन्नत और समृद्ध नगर था। यहाँ के महाजनों का मेवाड़ के जावर खनन क्षेत्र से गहरा व्यावसायिक संबंध होने की प्रबल संभावना है।
इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल शिलादित्य कालीन मेवाड़ के साथ आर्थिक और वाणिज्यिक रिश्तों की नई कड़ी पेश करता है, जहाँ प्राचीन समय में देश-विदेश के व्यापारियों का आना-जाना लगा रहता था।







