April 10, 2026 1:01 pm

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मन की शुद्धि और वर्तमान में जीना ही सुखी जीवन का आधार: ब्रह्मऋषि प्रेमनाथ

👤 Mewar Express News
April 10, 2026

उदयपुर। उदयपुर ध्यान महोत्सव के दूसरे दिन सुबह फतेहसागर पर उपस्थित ध्यानी जनों को ब्रह्मऋषि प्रेमनाथ जी ने गहरे ध्यान का अनुभव करवाते हुए उद्बोधन में कहा कि मानवीय जीवन में भौतिक प्रगति के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी अनिवार्य है। केवल किताबी ज्ञान धन कमाने का साधन हो सकता है, लेकिन जीवन की वास्तविक समझ के लिए आत्मज्ञान आवश्यक है, जो हमारे भीतर ही मौजूद है। उन्होंने रमण महर्षि जैसे महान ऋषियों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे ध्यान के माध्यम से उन्होंने आत्म-चेतना को प्राप्त किया।

ब्रह्मऋषि प्रेमनाथ जी ने ‘वर्तमान क्षण’ में जीने की कला पर जोर देते हुए कहा कि हमारा मन अक्सर भूतकाल की यादों या भविष्य के डर की चिंताओं में भटकता रहता है, जो दुःख का मुख्य कारण है। उन्होंने वर्धमान महावीर का संदर्भ देते हुए समझाया कि जिसने अपने मन को जीत लिया और वर्तमान में रहना सीख लिया, वही वास्तव में वर्तमान मे है, मतलब ‘वर्धमान महावीर’ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मन की एकाग्रता और सकारात्मक सोच एक ‘ब्रह्मास्त्र’ की तरह है, जिससे हम अपनी परिस्थितियों को बदल सकते हैं।

कार्यक्रम में समग्रम पिरामिड के संस्थापक डॉ निहाल जैन ने उपस्थित जनसमूह को प्रातःकालीन सूर्य की सौम्य किरणों का पान करवाया और विशेष तरीके से आल्हादित कराते हुए सभी को असीम ऊर्जा से रूबरू करवाया। उन्होंने ध्यान और शाकाहार को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। ब्रह्मऋषि प्रेमनाथ ने विभिन्न प्रेरक कहानियों के माध्यम से बताया कि संकल्प और ध्यान से असाध्य कार्यों को भी सिद्ध किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को ‘भगवान का रूप’ बताते हुए कहा कि उनके पास अभी मन की जटिलताएं नहीं हैं, इसलिए उन्हें बचपन से ही ध्यान का अभ्यास कराना चाहिए। ध्यान सभा में जादूगर आंचल एवं जयपुर से आए सप्तचक्रा विशेषज्ञ अमित श्रीवास्तव ने भी प्रेजेंटेशन दिया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहना की।

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