April 9, 2026 6:52 pm

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जीवन का सर्वांगीण उत्थान ध्यान से संभव

👤 Mewar Express News
April 9, 2026

उदयपुर। शोभागपुरा स्थित समग्रम पिरामिड केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय ध्यान महोत्सव के पहले दिन विशेष आध्यात्मिक सत्र में ब्रह्मऋषि प्रेमनाथ जी ने मानव जीवन में ध्यान की आवश्यकता बताते हुए शरीर, मन, बुद्धि, ज्ञान और ध्यान के अंतर्संबंधों पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बुद्धि का सही उपयोग केवल ज्ञान के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण के पास बुद्धि की कमी नहीं थी, लेकिन सही ज्ञान के अभाव में उसका पतन हुआ, जबकि श्री राम ने अपनी बुद्धि को धर्म और ज्ञान के साथ जोड़कर आदर्श स्थापित किया। उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत हमारी ऊर्जा आंखों से और 20 प्रतिशत ऊर्जा मुंह से खर्च होती हैं, शुरुआत में इन्हें रोककर हम ध्यान की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

चर्चा के दौरान ध्यान को ऊर्जा का मुख्य स्रोत बताते हुए कहा गया कि जिस प्रकार शरीर को भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार आत्मा को ऊर्जा चाहिए और वह ‘ध्यान’ से सहज मिल जाती है।

सत्र में बताया गया कि ध्यान के माध्यम से हम ब्रह्मांडीय ऊर्जा को प्राप्त कर सकते हैं, जो हमारे पिछले जन्मों के कर्मों और पापों को भस्म करने की शक्ति रखती है। पौराणिक कथाओं का संदर्भ देते हुए बताया गया कि कैसे डाकू रत्नाकर को आत्मज्ञान हुआ और वाल्मीकि बन रामायण की रचना कर डाली और अंगुलिमाल जैसे व्यक्तियों ने ध्यान और सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को पूरी तरह परिवर्तित कर लिया और ऋषि पद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में समग्रम के संस्थापक डॉ. निहाल जैन ने कहा कि सदैव हमारा उद्देश्य ‘समग्र जीवन शैली’ पर जोर देना रहता हैं। उन्होंने बताया गया कि ध्यान के लिए किसी विशेष स्थान या समय का बंधन अनिवार्य नहीं है, इसे बस, ट्रेन या घर पर कहीं भी अभ्यास में लाया जा सकता है। पिरामिड केंद्र के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहाँ का वातावरण आंतरिक संवेदनाओं और वाइब्रेशन्स को जागृत करने में सहायक है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य, समरसता और आनंद का प्रसार करना है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को समग्रता के साथ जी सके।
इस अवसर पर 100 से अधिक ध्यान प्रेमी उपस्थित रहे।

डॉ निहाल जैन ने अवगत कराया कि तीन दिवसीय उदयपुर ध्यान महोत्सव की अगली कड़ी में ध्यान का कार्यक्रम 10 अप्रैल को फतहसागर की पाल पर 5:30 बजे से 8:00 बजे तक होगा एवं दिनांक 11 अप्रैल 2026 को यही कार्यक्रम 5:30 बजे से 8:00 बजे तक मांझी के मंदिर पर आयोजित किया जाएगा उन्होंने अधिक से अधिक जनमानस को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

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