उदयपुर। पारस हेल्थ उदयपुर ने अपने नए रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) मशीन से एक मरीज के वैरिकोज़ वेन्स और एसएफजे (सैफेनोफेमोरल जंक्शन) की समस्या का सफल इलाज किया है।
यह इलाज 68 साल के एक मरीज पर किया गया। वह वैरिकोज़ वेन्स के आम लक्षणों जैसे टांगों में सूजन, भारीपन और परेशानी से जूझ रहे थे। जांच में पता चला कि उन्हें एसएफजे इनकम्पिटेंस है। यह एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें टांग की ऊपरी नस का वॉल्व ठीक से काम नहीं करता, जिससे खून उल्टी दिशा में बहने लगता है और नसों में जमा हो जाता है।
इस इलाज का नेतृत्व डॉ. अभिषेक व्यास ने किया। डॉ व्यास पारस हेल्थ उदयपुर में एडवांस लेप्रोस्कोपिक और बेरियाट्रिक सर्जरी के कंसल्टेंट हैं। लेज़र थेरेपी में तापमान 300°C से ज़्यादा हो सकता है और आसपास के टिशूज़ को नुकसान पहुंच सकता है, लेकिन उसकी तुलना में RFA में हीट को कंट्रोल तरीके से (120°C तक) प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। इससे दर्द, सूजन और सर्जरी के बाद होने वाली दिक्कतों का खतरा काफी कम हो जाता है।
डॉ अभिषेक व्यास ने इस बारे में बताते हुए कहा, “इस केस में RFA का इस्तेमाल बहुत प्रभावी साबित हुआ। इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह नस को बहुत सटीक तापमान से बंद करता है, जिससे आसपास के टिशूज़ को कोई नुकसान नहीं होता। 68 साल के इस मरीज को इलाज के बाद बहुत कम दर्द हुआ, इलाज के बाद कोई सूजन या निशान नहीं थे और कुछ घंटों के भीतर ही वह आराम से चलने लगे। यह प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया में होती है, जिससे रिकवरी जल्दी होती है और खतरे बहुत कम हो जाते हैं।
रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) आजकल वैरिकोज़ वेन्स के इलाज के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनता जा रहा है, खासकर उन मरीजों के लिए जो पारंपरिक सर्जरी या लेज़र थेरेपी के मुकाबले कम दर्द वाला और आसान इलाज चाहते हैं। इसके कई फायदे हैं, जैसे इसमें शरीर को कम नुकसान, जल्दी रिकवरी, कम निशान और सही तरीके से किए जाने पर दोबारा परेशानी होने का खतरा भी कम होता है।






