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प्राकृत भाषा सब भाषाओं की जननी: डॉ. ज्योतिबाबू 

👉 श्री भक्तामरजी वाचन प्रतियोगिता संपन्न 
👉 48 विजेताओं को मिला चांदी का सिक्का
👤 Mewar Express News
September 29, 2024

उदयपुर। भक्तामर और जिन वाणी के प्रति अवेयरनेस लाने के लिहाज से भक्तामर के 48 श्लोकों पर आधारित भक्तामर वाचन प्रतियोगिता विज्ञान समिति में संपन्न हुई। उल्लेखनीय है की पिछले 30 वर्षों से योग एवं रेकी के क्षेत्र में सेवारत भगवान महावीर योग एवं रेकी संस्थान द्वारा आयोजित भक्तामरजी वाचन प्रतियोगिता के बारे में

संस्थान के चेयरमेन रेकी ग्रांड मास्टर महावीर प्रसाद जैन ने बताया की आयोजन में विशिष्ठ अतिथि आरएमवी की कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ पुष्पा कोठारी, मुख्य अतिथि समाजसेवी देवेंद्र छाप्या, आई आई टी खड़गपुर के विधार्थी सिद्धार्थ गाँधी एवं डॉ ज्योति बाबू जैन निर्णायक जज विभागाध्यक्ष, सुखाड़िया विश्वविद्यालय इत्यादि के उद्बोधन और प्रतियोगियों को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर डॉ ज्योति बाबू जैन ने कहा की प्राकृत भाषा सब भाषाओं की जननी है। भक्तामर में 48 श्लोक है और हरेक का अपना विशेष महत्व है।

संस्थान अध्यक्ष बेला जैन ने बताया की प्रतियोगिता में 130 से अधिक प्रतिभागीयों ने भाग लिया। सम्पत बापना, भावना बाबेल, संजय बोबरा, नयना दोषी, नलीना लोढ़ा, आशा मेहता ने अतिथियों का परिचय करवाया।

महासचिव स्वाति गाँधी ने बताया की आयोजन में सही उत्तर देने वाले 48 प्रतिभागीयों को चांदी का सिक्का पुरस्कार स्वरूप दिया गया, गलत उत्तर वाले को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। आयोजन में शिवानी, कृष्णा थिरानी, प्रियल गाँधी, आर्यन जैन शनाया जैन अमेरिका, हितेंद्र कोठारी, रमेश भटनागर, सुनीता खंडेलवाल और कुंथु कुमार जी जैन आदि का विशेष सहयोग रहेगा।

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