उदयपुर। हिमाचल प्रदेश के सेब बागवान पिछले कुछ समय से बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल की घटती गुणवत्ता से परेशान हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए ‘अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड’ ने प्रदेश में मिट्टी की जाँच (सॉइल टेस्टिंग) का एक विशेष अभियान शुरू किया है। यह कैंपेन 5 जनवरी से शुरू होकर 22 जनवरी तक चलेगा। इसके तहत सेंज में 12 जनवरी तक, रोहड़ू में 13 से 18 जनवरी तक और रामपुर में 18 से 22 जनवरी तक कैंप लगाए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना है कि खाद डालने से पहले मिट्टी की वैज्ञानिक जाँच क्यों जरूरी है, ताकि मिट्टी स्वस्थ रहे और फसल बेहतर हो।
इस अभियान में नौनी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक, लैब टेक्नीशियन और कृषि विशेषज्ञ किसानों से सीधी बातचीत कर रहे हैं। वे किसानों को जानकारी दे रहे हैं कि उनकी ज़मीन में किन पोषक तत्वों की कमी है और उसे पूरा करने के लिए कितनी और कौन सी खाद डालनी चाहिए। इसके अलावा, सेब के पौधों की सही प्रूनिंग (कटाई-छंटाई) और बीमारियों से बचाव के तरीके भी समझाए जा रहे हैं। इस पूरे अभियान में 3 से 4 हजार से अधिक किसानों के शामिल होने की उम्मीद है, जिससे वे अपनी खेती को वैज्ञानिक तरीके से सुधार सकें।
अदाणी एग्री फ्रेश लंबे समय से हिमाचल के किसानों की मदद के लिए काम कर रहा है, चाहे वह सेब की खरीद हो या तकनीकी मार्गदर्शन। कंपनी ने इससे पहले नवंबर महीने में भी इसी तरह का अभियान चलाया था, जिसे किसानों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। कई किसानों ने माना कि मिट्टी की जाँच के बाद सही खाद के इस्तेमाल से उनकी फसल में सुधार हुआ है। कंपनी की यह पहल केवल मिट्टी की जाँच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों को लंबे समय तक टिकाऊ और मुनाफे वाली खेती की ओर ले जाने का एक प्रयास है।






