उदयपुर। उदयपुर के मीरा नगर में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु वसंत विजयानन्द गिरी के सानिध्य में चल रहा श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ और साधना महोत्सव अब अपने अंतिम चरण में है। इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु अनुशासन के साथ महायज्ञ और पूजा-पाठ में हिस्सा ले रहे हैं। महोत्सव के छठे दिन शिव पुराण कथा के दौरान गुरुदेव ने योग शास्त्र के गहरे रहस्यों को साझा किया। उन्होंने बताया कि हताशा और निराशा के समय शांत बैठकर गहरी श्वांस लेने से शरीर ऊर्जा से भर जाता है। उन्होंने यह भी समझाया कि श्वांस जितनी धीमी होगी, उम्र उतनी ही लंबी होगी।
गुरुदेव ने जीवन में सफलता पाने के लिए अपना आभामंडल (aura) सुधारने पर जोर दिया। उन्होंने मकड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मकड़ी अपने जाल से शिकार को आकर्षित करती है, वैसे ही व्यक्ति का सकारात्मक आभामंडल उसकी मनचाही सफलताओं को अपनी ओर खींचता है। नकारात्मक शक्तियों और नजर दोष से बचने के लिए उन्होंने सरल उपाय भी बताए। उन्होंने सुझाव दिया कि घर में सफेद गुड़हल का पौधा लगाने और रविवार को नमक के पानी से स्नान करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
कथा के दौरान गुरुदेव ने विभिन्न मुद्राओं के महत्व को भी समझाया। उन्होंने बताया कि इन मुद्राओं के माध्यम से व्यक्ति सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त कर सकता है और देवी-देवताओं की विशेष कृपा पा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने वशिष्ठ ऋषि, कामधेनु और राजा कवचिक के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे नंदिनी गाय की करुण पुकार पर भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए और उसे वरदान दिया, जिससे राजा की सेना पराजित हुई।
इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कथा का सार बताते हुए कहा कि अहंकार की हमेशा हार होती है। उन्होंने जीवन के दर्शन को समझाते हुए कहा कि हालांकि सुख में आनंद मिलता है, लेकिन मनुष्य का जीवन असल में दुखों और संघर्षों से ही निखरता है। इसी प्रसंग के बाद राजा कवचिक ने तपस्या की और वे विश्वामित्र कहलाए, जिन्होंने आगे चलकर जग कल्याण का मार्ग चुना।
समारोह में राजस्थान के पूर्व मंत्री और निम्बाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने भी शिरकत की और जगद्गुरु वसंत विजयानन्द गिरी से आशीर्वाद लिया। कृष्णगिरी शक्तिपीठ के अध्यक्ष शंकेश जैन ने उनका स्वागत किया। महोत्सव में रोजाना सुबह मंत्रोच्चार के साथ साधना की जा रही है, जिसमें श्रद्धालु समृद्धि कलश और जीबू कॉइन सिद्ध कर रहे हैं। महालक्ष्मी यज्ञ की आहुतियों में भी बड़ी संख्या में लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।








