उदयपुर। ध्यान महोत्सव के तीसरे दिन पिछोला मांझी के मंदिर पर 70 से ज्यादा लोगों ने ध्यान किया। समग्रम पिरामिड के संस्थापक डॉ. निहाल जैन ने गाइडेड मेडिटेशन करवाया। जैन ने आधुनिक जीवन में ‘ध्यान’ की महत्ता पर विशेष चर्चा की।
इस अवसर पर जयपुर से आए स्प्रिचुअल मास्टर्स ने यह स्पष्ट किया गया कि ध्यान केवल एकाग्रता नहीं, बल्कि स्वयं के साथ होने की एक प्रक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार ध्यान का अर्थ अपनी सभी इंद्रियों और ऊर्जा को एक केंद्र पर स्थिर करना है। मतलब बिना किसी बाहरी भटकाव के अपने भीतर झांकते हैं और वर्तमान क्षण को पूरी तरह स्वीकार करते हैं, तो वही वास्तविक ध्यान कहलाता है।
ध्यान क्यों करें विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मानसिक और शारीरिक शुद्धि का सबसे सशक्त माध्यम है। जब हम ध्यान की गहराई में उतरते हैं, तो ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) हमारे शरीर में प्रवेश करती है, जो न केवल तनाव और मानसिक विकारों को दूर करती है, बल्कि शरीर के भीतर के अवरोधों को समाप्त कर उसे ऊर्जावान बनाती है। ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपनी जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान स्वयं के भीतर खोजने में सक्षम होता है और आत्म-प्रेम व संतोष की भावना जागृत होती है।
उन्होंने बताया कि ध्यान किसी भी वक्त किया जा सकता है, परंतु नियमितता आवश्यक है। विशेषज्ञों ने ‘आनापानसती’ ध्यान (सांसों पर ध्यान) को सबसे सरल और प्रभावी बताया। इसके लिए किसी भी शांत स्थान पर सुखासन में बैठकर अपनी स्वाभाविक सांसों को महसूस करना होता है।
शुरुआती साधकों को कम से कम अपनी उम्र के बराबर (जैसे 20 वर्ष की आयु है तो 20 मिनट) ध्यान करने का संकल्प लेना चाहिए। नियमित अभ्यास से व्यक्ति ‘माइंडफुलनेस’ से ‘माइंड-फ्रीनेस’ की अवस्था तक पहुँच सकता है, जो पूर्ण शांति का मार्ग है।
इस अवसर पर स्थानीय पुजारीयों द्वारा हनुमान चालीसा पाठ भी किया गया।







